सरकार ने सबको बजट समझाने की व्यवस्था की है।जिन्हें वित्तमंत्री की भाषा समझ में आती हैं, वो वित्तमंत्री से समझ लिए, जिन्हें मोदीजी की भाषा समझ में आती हैं वो मोदीजी से समझ लिए। बचे खुंचों को संबित पात्रा समझा रहे हैं।
पर मेरी समझ में यह नहीं आया कि:
(1) किसानो को उस की उपज का सही दाम क्यों नहीं मिला अभी तक?
(2) सरकार उन्हीं की बात सुनती है जो ग्रुप बना कर उस के पास जाते हैं, बेचारे किसान!
(3) ऊंचे घराने के बिजनेस मैन की हर सरकार में पूछ होती है।
(4) राजनीतिक लोगों की आमदनी पर कोई छापा नहीं पड़ता ।
(5) राम देव जैसे हीन लोग भी सम्मान पाते हैं व डाक्टर/वैद्य माने जाते हैं ।
(6) भ्रष्टाचार सारी सीमाएं लांग चुका है।सेना में तो हद ही है।आज यह भ्रस्टाचार बंद करना प्रमुखता नहीं रह गया है।
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